((नोट- यह व्यंग्य रचना महान व्यंग्यकार एवं गुरुवर हरिशंकर परसाई की एक प्रसिद्ध व्यंग्य रचना से प्रभावित है और मुझे लगता है कि अगर परसाई जी आज जीवित होते तो इस विषय पर जरूर कलम चलाते। इस व्यंग्य का पहला हिस्सा यहां पेश हैं। वैसे ढिबरी चैनल के बारे में विज्ञापन तो अखबारों में छप चुका था, लेकिन ढिबरी न्यूज के 'एम्स एंड आब्जेक्टिव्स्' तथा उसके गठन के 'मेमोरेंडम' बही खातों के बीच दबे रह गये थे। यह लेखक जब किसी काम से चैनल के मुख्यालय में गया तो सेठजी के आसन के पास की एक पुरानी बही में यह नत्थी किया हुआ मिला जिसे हम यहां घोषणापत्र के नाम से प्रस्तुत कर रहे हैं। वैसे सबसे पहले इसे ही छापा जाना चाहिये था, लेकिन समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे अब सुधी पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। -लेखक))
अभिव्यक्ति


खबर है कि हजरत मौहम्मद साहब के कार्टून की श्रंखला बनाने वाले डेनमार्क के कॉर्टूनिस्ट कर्ट वेस्टरगार्ड की एक सोमालियाई युवक ने जान लेने की कोशिश की है। आपको याद होगा कि डेनमार्क के उस कार्टूनिस्ट का कत्ल करने वाले को हमारे शहर मेरठ के एक नेता हाजी याकूब कुरैशी ने ने 51 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था। कुरैशी के ऐलान की गूंज पूरी दुनिया में हुई थी। याकूब कुरैशी रातों-रात सुर्खियों में आ गए थे। वे आशिक-ए-रसूल (पहली बार पता चला था कि आशिक-ए-रसूल कैसे बना जाता है) हो गए थे। मालूम नहीं कि सोमालिया के युवक तक आशिक-ए-रसूल के ऐलान की खबर पहुंची थी या नहीं, हां इतना जरुर है कि यदि वह युवक कार्टूनिस्ट को कत्ल करने में कामयाब हो जाता तो 51 करोड़ रुपए का हकदार हो जाता। यह सवाल भी मेरे दिमाग में घुमड़ रहा है कि याकूब कुरैशी अपने वादे पर खरे उतरते या नहीं? 
